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शरीर जलने पर क्या करे ? – आसाराम बापूजी

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कच्चे आलु के सलाईस अथवा उसका पानी जले हुए अंग पें लगा दें एक बार में ठीक हो जाँएंगा ।

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शरीर जलने पर क्या करे ? – आसाराम बापूजी

चैतन्य की सुंदर लीला

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Sant Asharamji Bapu

एक तपस्वी ने 12 साल भजन किया । देखा, कुछ हुआ नहीँ, भगवान तो आये नहीँ कोई सिध्दि भी नही आयी, जनता के बिच प्रतिष्ठा भी नहीँ । ले तेरी कंठी,धर तेरी माला । बाबा-वाबाओ का संग एकांतवास सब छोडो । वे तपस्वी चल पडे ईश्वर को कोसते हुए ।
रास्ते मेँ 13-14 साल के एक लडके ने पूछा : “आप कहाँ जा रहे हैँ ?”
तपस्वी बोले : ” अपने घर को जा रहे हैँ ।”
लडका बोला : ” हम भी चलते हैँ , हमे भी उसी गाँव की ओर जाना है ।”
दोनो चलते गये । रात हुई किसने स्थान दिया ; सोचा ,’अतिथि तपस्या करके लौटे हैँ । दोनो को सोने के बर्तनो मेँ भोजन कराया । लडके ने एक सोने की कटोरी छुपा ली । दूसरी रात वे एक किसान के खलिहान मेँ गये । रात बितायी । लडके ने वह कटोरी वही रख दी । तपस्वी देखता रहा ।
सुबह हुई,चले । रास्ते मेँ नदी लाँघनी थी । एक बालक नदी मेँ स्नान कर रहा था । इस लडके ने नहाने वाले बालक का गला दबोच लिया । वह बालक मर गया । तपस्वी से सहन हुआ ,बोले ” तू क्या करता है , मेरे साथ तू क्यो आया ?” ,लडके का रुप गायब हो गया और भगवान प्रकट हुए ।” प्रभु तुम !…”
भगवान बोले : भगवान जो करते हैँ उसमे खोपडी नही लगाना यह कैसा है , वह कैसा है ,शिशु को अपने कल्याण के बारे मेँ क्या पता !
तपस्वी बोले : प्रभु ! हम तो आपके शिशु हैँ लेकिन आपने चोरी क्यो किया और चोरी किया हुआ पात्र दूसरे को दे दिया ! निर्दोष बालक को मृत्यु दे के रवाना हो गयेँ ! ये बात हमे समझ नही आयी ।
भगवान बोले: जो मेरा भाव प्रधान भगत था उसकी मैने कटोरी चुरा ली । इतना भावप्रधान नही होना चाहिए की अनजान को भी सुवर्ण पात्र मेँ भोजन कराये , अब से वह सावधान हो जायेगा ,गाँववाले निगुरे थेँ सेवा से वंचित थे तो मैने सुवर्ण इसलिए दिया की लालच से ही वे सेवा करने मेँ तत्पर होँ । गला इसलिए दबाया क्योकि बेटे का बाप मंत्री था अधर्म करके वह राज्यसत्ता बेटे को देता बेटा भी अनर्थ करता और जनता त्राहिमाम पुकारती ।
बेटा सृष्टीकर्ता को गुरु को अपनी मान्यता से नापना परेशानी का मूल है ।
तपस्वी बोले : सब जगह हम अपनी खोपडी लगाते हैँ इसलिए सिर चकाराता है । सब जगह चैतन्य की सुंदर लिला है । और यह मानविय दिमाग से परे है । गूढ की बात मूढ कहाँ जाने ।

The Truth – A big conspiracy ?

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Truth behind false allegations against Asaram Bapu..A big conspiracy? Watch it to decide yourself

महेन्द्र चावला के आरोपों की हकीकत

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विदेशी षड्यंत्रकारियों का हत्था बनकर मीडिया में आश्रम के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों की झड़ी प्रचारित करनेवाले महेन्द्र चावला की न्यायाधीश श्री डी. के. त्रिवेदी जाँच आयोग के समक्ष पोल खुल गयी । चालबाज महेन्द्र ने वास्तविकता को स्वीकारते हुए उसने कहा कि मैं अहमदाबाद आश्रम में जब-जब आया और जितना समय निवास किया, तब मैंने आश्रम में कोई तंत्रविद्या होते हुए देखा नहीं ।
आश्रम में छुपे भोंयरे (गुप्त सुरंग) होने का झूठा आरोप लगानेवाले महेन्द्र ने सच्चाई को स्वीकारते हुए माना कि यह बात सत्य है कि जिस जगह आश्रम का सामान रहता है अर्थात् स्टोर रूम है, उसे मैं ‘भोंयरा’ कहता था ।
श्री नारायण साँर्इं के नाम के नकली दस्तावेज बनानेवाले महेन्द्र ने स्वीकार किया कि यह बात सत्य है कि कम्प्यूटर द्वारा किसी भी नाम का, किसी भी प्रकार का, किसी भी संस्था का तथा किसी भी साइज का लेटर हेड तैयार हो सकता है । बनावटी हस्ताक्षर किये गये हों, ऐसा मैं जानता हूँ ।
महेन्द्र ने स्वीकार किया कि वह दिल्ली से दिनांक ५-८-०८ को हवाई जहाज द्वारा अहमदाबाद आया, जहाँ अविन वर्मा, वीणा चौहान व राजेश सोलंकी पहले से ही आमंत्रित थे । इन्होंने प्रेस कॉन्फरेंस द्वारा आश्रम के विरोध में झूठे आरोपों की झड़ी लगा दी थी । साधारण आर्थिक स्थितिवाला महेन्द्र अचानक हवाई जहाजों में कैसे उड़ने लगा ? यह बात षड्यंत्रकारियों के बड़े गिरोह से उसके जुड़े होने की पुष्टि करती है ।
महेन्द्र के भाइयों ने पत्रकारों को दिये इंटरव्यू में बताया : ‘‘आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद हमने उसकी प‹ढाई के लिए पानीपत में अलग कमरे की व्यवस्था की थी । उसकी आदतें बिगड़ गयीं । वह चोरियाँ भी करने लगा । एक बार वह घर से ७००० रुपये लेकर भाग गया था । उसने खुद के अपहरण का भी नाटक किया था और बाद में इस झूठ को स्वीकार कर लिया था ।
इसके बाद वह आश्रम में गया । हमने सोचा वहाँ जाकर सुधर जायेगा लेकिन उसने अपना स्वभाव नहीं छोड़ा । और अब तो धर्मांतरणवालों का हथकंडा बन गया है और कुछ-का-कुछ बक रहा है । उसे जरूर १०-१५ लाख रुपये मिले होंगे । नारायण साँर्इं के बारे में उसने जो अनर्गल बातें बोली हैं वे बिल्कुल झूठी व मनगढ़ंत हैं ।’’
महेन्द्र के भाइयों ने यह भी बताया : ‘‘आश्रम से आने के बाद किसीके पैसे दबाने के मामले में महेन्द्र के खिलाफ एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई थी । मार-पिटाई व झगड़ा खोरी उसका स्वभाव है । वास्तव में महेन्द्र के साथ और भी लोगों का गैंग है और ये लोग ही ‘मैं नारायण साँर्इं बोल रहा हूँ, मैं फलाना बोल रहा हूँ… मैं यह कर दूँगा, वह कर दूँगा…’ इस प्रकार दूसरों की आवाजें निकालके पता नहीं क्या-क्या साजिशें रच रहे हैं !’’
अंततः महेन्द्र चावला की भी काली करतूतों का पर्दाफाश हो ही गया । इस चालबाज साजिशकर्ता को उसके घर-परिवार के लोगों ने तो त्याग ही दिया है, साथ ही समाज के प्रबुद्धजनों की दुत्कार का भी सामना करना पड़ रहा है । भगवान सबको सद्बुद्धि दें, सुधर जायें तो अच्छा है ।
ऐसे विदेशियों के हथकंडे झूठे साबित हो ही रहे हैं । कोई जेल में हैं तो किसीको परेशानी ने घेर रखा है तो कोई प्रकृति के कोप का शिकार बन गये हैं । और उनके सूत्रधारों के खिलाफ उन्हींका समुदाय हो गया है । यह कुदरत की अनुपम लीला है । कई देशों में तथाकथित धर्म के ठेकेदारों द्वारा सैकड़ों बच्चों का यौन-शोषण कई वर्षों तक किया गया । गूँगे-बहरे, विकलांग बालकों का यौन-शोषण और वह भी इतने व्यापक पैमाने पर हुआ । उसका रहस्य प्रकृति ने खोल के रख दिया है। ऐसी नौबत आयी कि साम, दाम, दंड, भेद आदि से भी विरोध न रुका । आखिरकार इन सूत्रधारों को जाहिर में माफी माँगनी पड़ी । पूरे यूरोप का वकील-समुदाय बालकों-किशोरों का यौन-शोषण करनेवालों के खिलाफ खड़ा हो गया । भारत को तोड़ने की साजिशें रचनेवाले अपने कारनामों की वजह से खुद ही टूट रहे हैं । पैसों के बल से न जाने क्या-क्या कुप्रचार करवाते हैं परंतु सूर्य को बादलों की कालिमा क्या ढकेगी और कब तक ढकेगी ? स्वामी रामतीर्थ, स्वामी विवेकानंद, नरसिंह मेहता, स्वामी रामसुखदासजी आदि के खिलाफ इनकी साजिशें नाकामयाब रहीं । ऐसे ही अब भी नाकामयाबी के साथ कुदरत का कोप भी इनके सिर पर कहर बरसाने के लिए उद्यत हुआ है ।

Bhishma Panchak Vrat (भीष्म पंचक व्रत)

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Bhishma Panchak Vrat

  From Hari Prabodhini Ekadashi to Kaartik Poornima

bhishma

भीष्म पंचक व्रत

महाभारत युद्ध के बाद जब पांण्डवों की जीत हो गयी तब श्री कृष्ण भगवान पांण्डवों को भीष्म पितामह के पास ले गये और उनसे अनुरोध किया कि आप पांण्डवों को अमृत स्वरूप ज्ञान प्रदान करें. भीष्म भी उन दिनों शर सैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतिक्षा कर रहे थे. कृष्ण के अनुरोध पर परम वीर और परम ज्ञानी भीष्म ने कृष्ण सहित पाण्डवों को  राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया. भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम कार्तिक शुक्ल एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक पांच दिनों तक चलता रहा. भीष्म ने जब पूरा ज्ञान दे दिया तब श्री कृष्ण ने कहा कि आपने जो पांच दिनों में ज्ञान दिया है यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गया है. इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंचक व्रत के नाम से जाना जाएगा. यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी होगा |

 

भीष्मजी को अर्ध्य देने से पुत्रहीन को पुत्र प्राप्त होता है | जिसको स्वप्नदोष या ब्रह्मचर्य सम्बन्धी गन्दी आदतें या तकलीफें हैं, वह इन पांच दिनों में भीष्मजी को अर्ध्य देने से ब्रह्मचर्य में सुदृढ़ बनता है | हम सभी साधकों को इन पांच दिनों में भीष्मजी को अर्ध्य जरुर देना चाहिए और ब्रह्मचर्य रक्षा के लिए प्रयत्न करना चाहिए


सूर्योदय से पूर्व उठना और पवित्र नदियों का स्मरण करते हुए संभव हो तो तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए | स्नान के बाद निम्न प्रार्थना करते हुए चन्दन  और तिल मिश्रित जल से भीष्मजी को अर्ध्य देना चाहिए :

 

गंगाजी के सुपुत्र, आजीवन ब्रह्मचर्य पालन करनेवाले पितामह भीष्म को यह अर्ध्य अर्पण है, हमें ब्रह्मचर्य में सहायता करना”


भीष्म पंचक व्रत का पूर्ण विवरण  जानने हेतु कृपया आश्रम से प्रकाशित एकादशी महात्म्य नाम की वीडियो सीडी देखें


 


 If someone observes this fast, he is considered to have observed all other fasts, because it is greatly meritorious and frees one from great sins. Therefore, everyone should make a great endeavor to fast on these last five days of Bhismadeva.

“The fast should begin by remembering Bhismadeva on the Ekadasi day and should end on Purnima [the full moon]. One should eat only vegetables or fruits and should worship Lord Krishna. If he needs to eat, he should do so only in the evening. A woman can also observe this fast , and if a widow observes this fast, she can also attain liberation and happiness.”

 

The exact details about the mahatmaya and the procedure to do the BhishmaPanchak Vrat can be heard in Video CD Ekadashi Mahatmya

 

“The last five days of Kartika month are known as Bhisma-Panacaka. Grandfather Bhisma fasted for these five days, preparing to give up his life. However one observes Kartika-vrata, he should intensify it for the last five days. The best way to observe the Kartika-vrata is to abstain from eating grains for the whole month, and to take only milk or water for the last five days. If one eats grains during the month, he should avoid them for the last five days. Also, one should only eat once a day. This is the proper procedure [for strict adherence].”

 

Things to do during the days of Bhishma Panchak Vrat 

 

One should get up before Sun rise and take bath with water remembering the Holy Rivers and mixing Til (Sesam)

After Bath, give Argya to Bheeshmaji, by mixing Chandan and Til in the water, and saying below sankalp:

 

“Gangaji ke Su-putra, Aajivan Bramhcharya Palan Karnewale Pitamaha Bhishma ko yeah Argya Arpan hain, Hame Bramhacharya mein Sahayta Karna” .