Uttam Swasthya

स्वस्थ जीवन प्राप्त करने की कुंजी

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स्वस्थ जीवन ही सफलता प्राप्त करने की कुंजी है।

स्वस्थ जीवन के लिए कुछ उपयोगी बातें इस प्रकार हैं-

पानी :-

  • सभी व्यक्तियों को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन सुबह के समय में बिस्तर से उठकर कुछ समय के लिए पालथी मारकर बैठना चाहिए और कम से कम १ से ३ गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए या फिर ठंडा पानी पीना चाहिए।
  • स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक व्यक्तियों को प्रतिदिन कम से कम १० से १२ गिलास पानी पीना चाहिए।

महत्वपूर्ण क्रिया :-

  • सभी व्यक्तियों को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन दिन में २ बार मल त्याग करना चाहिए।
  • सांसे लंबी-लंबी और गहरी लेनी चाहिए तथा चलते या बैठते और खड़े रहते समय अपनी कमर को सीधा रखना चाहिए।
  • दिन में समय में कम से कम २ बार ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।
  • दिन में कम से कम २ बार भगवान का स्मरण तथा ध्यान करें, एक बार सूर्य उदय होने से पहले तथा एक बार रात को सोते समय।

विश्राम :-

  • सभी मनुष्यों को भोजन करने के बाद मूत्र-त्याग जरूर करना चाहिए।
  • प्रतिदिन दिन में कम से कम १-२ बार ५ से १५ मिनट तक वज्रासन की मुद्रा करने से स्वास्थ्य सही रहता है।
  • सोने के लिए सख्त या मध्यम स्तर के बिस्तर का उपयोग करना चाहिए तथा सिर के नीचे पतला तकिया लेकर सोना चाहिए।
  • सोते समय सारी चिंताओं को भूल जाना चाहिए तथा गहरी नींद में सोना चाहिए और शरीर को ढीला छोड़कर सोना चाहिए।
  • पीठ के बल या दाहिनी ओर करवट लेकर सोना चाहिए।
  • सभी मनुष्यों को भोजन और सोने के समय में कम से कम ३ घण्टे का अन्तर रखना चाहिए।

 

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कफ प्रकोप निराकरण उपाय

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कफ प्रकोप के लक्षण-

– शरीर भारी, शीतल, चिकना और सफेद होना।

– अंगों में शिथिलता व थकावट का अनुभव होना। आलस्य का बना रहना ।

– ठंड अधिक लगना ।

– त्वचा चिकनी व पानी में भिगी हुई सी रहना।

– मुंह का स्वाद मीठा और चिकना होना। मुंह से लार गिरना।

– भूख का कम लगना। अरुचि व मंदाग्नि।

– मल, मूत्र, नेत्र ओर सारे शरीर का सफेद पड़ जाना। मल में चिकनापन और आंव का आना।

कफ प्रकोप के कारण

– मीठे, खट्टे, नमकीन पदार्थो का अति सेवन।

– शीतल, चिकने भारी गाढ़े और गरिष्ठ पदार्थो का सेवन।

– अधिक मीठा, चिकना व ठंडा-बासी खाना।

– विरुद्ध आहार करना।

– भोजन के उपर भोजन करने या अजीर्ण में भोजन करना।

– दिन में ज्यादा सोना।

– परिश्रम या व्यायाम न करना।

– नमी वाले, दलदली, जलाशय और समुद्र के समीप वाले स्थानों में रहना।

कफवर्धक आहार का सेवन

जैसे – नए गेहूं की रोटी, चावल, जड़द, तिल, जैतून तेल, बादाम तेल । घी, मक्खन, पनीर,अधिक दही, दही की।

कफनाशक उपाय

–         कड़वे, चरपरे, कसैले रसयुक्त भोजन।

–         रूक्ष, हल्के, उष्ण पदार्थो का सेवन।

–         मेदोहर (मोटापा घटाने वाले) तथा कफनाशक औषधियों का सेवन जैसे त्रिफला-सेवन।

कफनाशक खाद्य-वस्तुएं:

पुराना गेहूं, जौ की रोटी, जौ, मूंग, मोठ, मसूर, चना, कुलथी, अलसी, तेल, सरसों तेल। बकरी का दूध, छाछ। नया शहद। बथुआ, टिण्डे, करेला, गाजर, खीरा, लहसुन, प्याज,अदरख, मूली का तेल में भुना शाक, सरसों के पतों का शाक। अनार, सेब, तरबूज, बेल,सूखे मेव

विशेष कफनाशक उपाय-

– वमन करना। जल नेति (योग-क्रियाएं) स्वेदन (पसीना लेना)।

– उपवास या अल्पाहार। दिन में एक बार भोजन करना या दो बार हल्का आहार करना। रात को देर से भोजन न करना।

– व्यायाम करना।

– दिन में सोने की आदत छोड़ना

– गर्म अथवा उबला हुआ पानी पीना।

– सर्दी-नमी से बचना। गर्म सा सीलन रहित घर में रहना।

– गर्म पानी से स्नान। धूप स्नान।

– गले में कफ का जमाव होने पर या दर्द होने पर गर्म पानी में नमक डालकर गरारें करना।

– लालच-लोभ की प्रवृति छोड़ना। मोह, भावुकता का परित्याग।