खग्रास चन्द्र ग्रहण 4 अप्रैल

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chandragrahan

ग्रहण में क्या करें क्या न करें
( भूभाग में ग्रहण का समय : दोपहर ३-४५ से शाम ७-१५ तक )

भगवन वेदव्यासजी कहते है की सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि ) एक लाख गुना, यदि गंगा-जल पास में हो तो एक करोड़ गुना फलदायी होता है ।
भूभाग में ग्रहण प्रारम्भ – दोपहर 3-45, समाप्त – शाम 7-15 तक ।

वेध (सूतक) – सुबह 6-45 से चालु है । अशक्त, वृद्ध, बालक, गर्भिणी तथा रोगी के लिए सुबह 11 बजे से वेध (सूतक) चालु है ।
ग्रहण के समय करणीय-अकरणीय नियम

१) ‘देवी भागवत’ में आता है : ‘सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करनेवाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है । फिर वह उदर-रोग से पीड़ित मनुष्य होता है । फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है ।
२) सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर (१२ घंटे) पूर्व और चन्द्रग्रहण में तीन प्रहर (९ घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए । बूढे, बालक और रोगी डेढ प्रहर (साढे चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं । ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए ।
३) ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते । जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए ।
४) ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए । स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं ।
[५) ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए ।
६) ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्र और उनकी आवश्यक वस्तु दान करने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है ।
७) ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए ।
८) ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीडा, स्त्री-प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढी होता है । गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए ।
९) भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं : ‘सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड गुना फलदायी होता है ।’
१०) ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है ।
कुछ मुख्य शहरों में ग्रहण के पुण्य काल प्रारम्भ का समय नीचे दिया जा रहा है । पुण्य काल समाप्ति सभी स्थानों का ग्रहण समाप्ति (शाम 7-15) तक रहेगा ।
अहमदाबाद – शाम 6-54 से, सूरत – शाम 6-53 से, मुम्बई – शाम 6-52 से, हैदराबाद – शाम 6-28 से, दिल्ली – शाम 6-38 से, कलकत्ता – शाम 5-49 से, नागपुर – 6-27 से, जयपुर – 6-43 से,6 रायपुर – 6-16 से, पुरी – 5-58 से, चंडीगढ़ – शाम 6-41 से, इन्दौर – शाम 6-41 से, उज्जैन – शाम 6-41 से , जबलपुर – शाम 6-24 से, जोधपुर – शाम 6-55 से, लुधियान – शाम 6-45 से, अमृतसर – शाम 6-50 से, जम्मू – शाम 6-50 से, लखनऊ – शाम 6-22 से, कानपुर – शाम 6-24 से, वाराणसी – शाम 6-13 से, इलाहबाद – शाम 6-17 से, पटना – शाम 6-04 से, राँची – शाम 6-02 से, नासिक – शाम 6-48 से, औरंगाबाद – शाम 6-42, वड़ोदरा – शाम 6-52, बैंगलोर – शाम 6-29 से, चेन्नई – शाम 6-18 से, देहरादुन – 6-36 से

 

Also Read:

चंद्रग्रहण [4/4/2015] – कुछ विशेष जानकारी http://asharambapunews.org
ચંદ્રગ્રહણ માં એક લાખ ઘણું પુણ્ય..  http://www.asarambapuji.org

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